अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि एवं कथा क्या है हिंदी में

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Hindu Panchalingeshwara Temple  - prasanna_devadas / Pixabay
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1सितंबर 2020 दिन मंगलवार अनंत चतुर्दशी

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अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है इस पर्व को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूपों की पूजा की जाती है इस कारण इस पर्व का नाम अनंत चतुर्दशी रखा गया भगवान विष्णु के साथ-साथ यमुना नदी और शेषनाग जी की पूजा भी इस व्रत में की जाती है

अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि

पर्व का वर्णन अग्नि पुराण में मिलता है पर्व में धान के आटे की रोटी या पूरी बनाई जाती हैं व्रत को रखने वाले प्रात काल उठकर स्नान आदि कर घटस्थापना करते हैं इस घट पर कुमकुम से रंगा हुआ अनंत रखा जाता है इस अनंत को पुरुष अपने दाएं हाथ पर तथा स्त्रियां अपने बाएं हाथ पर धारण करती हैं इस रंगी हुई धागे अनंत में 14 गांठे होती हैं ये 14 गांठे हरि द्वारा उत्पन्न 14 लोकों का प्रतीक होती हैं

अनंत चतुर्दशी की कथा


पौराणिक मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी का व्रत महाभारत काल से प्रारंभ हुआ भगवान विष्णु ने स्वयं द्वारा रचित 14 लोकों की रक्षा करने के लिए इसी दिन 14 रूपों धारण किए थे
व्रत को रखने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं सुख संपदा धन-धान्य और संतान की प्राप्ति होती है इस दिन भगवान विष्णु के अवतारों की कथाएं सुनी जाती हैं
कहा जाता है कि जब पांडव वनवास में थे और उनका सब कुछ छीन गया था तब भगवान श्री कृष्ण के कहने पर पांडवों ने अनंत चतुर्दशी का व्रत रखना प्रारंभ कर दिया और लगातार 14 वर्ष तक व्रत रखा यह व्रत रखने के फल स्वरुप पांडवों ने अपना सब कुछ खोया हुआ प्राप्त कर लिया और युद्ध में भी उन्हें बिजय प्राप्त हुई तभी से अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा जाता है और इस व्रत को 14 वर्ष तक प्रत्येक अनंत चतुर्दशी को रखना होता है तभी इसका पुण्य प्राप्त होता है

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