गाँव को डूबने से बचाने वाले दयालु बालक की प्रेरणादायक कहानी

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यूरोप में हालैंड देशका कुछ भाग समुद्र की सतह से नीचा होनेके कारण कभी-कभी समुद्र का जल आकर उस भागमें बसे गाँवों को डुबो देता था। इस दुःखसे बचनेके लिये वहाँके लोगोंने समुद्र के किनारे एक ऊँचा बाँध बना रखा था। फिर भी कभी-कभी जलका इतना वेग होता कि वह बाँध तोड़कर वहाँके लोगोंको नुकसान पहुँचाता।

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बाँध टूटनेसे पहले क्या-क्या नुकसान हुआ था, इसे घरके बड़े लोग अपने-अपने लड़कोंको बार-बार बताते और कहते कि ‘यदि बाँधसे तनिक भी पानी निकलने लगे तो उसके रोकनेका तुरंत उपाय करना चाहिए। नहीं तो वह पानी बाँध तोड़कर एक साथ जोरसे आ जायगा और जान-मालको बड़ी हानि पहुँचायेगा ।’

एक दिन जाड़ेमें एक लड़का उस बाँधके पाससे होकर जा रहा था; इतने में उसने देखा कि बाँधमेंसे धीरे धीरे पानी निकल रहा है। तुरंत ही उसे अपने बाप की कही बात याद आयी। उसने विचार किया कि ‘दौड़कर मैं यह बात अपने पितासे कहूँ या यहाँसे भागकर किसी ऊँची जगहपर चढ़ जाऊं।

फिर उसके मनमें आया कि ‘ऊँची जगह चढ़नेपर मैं अकेला तो बच जाऊँगा, पर दूसरे सभी लोग मर जाएंगे। क्या, मैं उनको भी किसी तरह नहीं बचा सकता ? मैं दौड़ता हुआ सबसे कहने जाऊँगा और इतने में पानी जोरसे आ जायगा और छेद बड़ा हो जानेसे सारा गाँव डूब जायगा। इसलिये यदि किसी तरह बाँधमेंसे आते हुए जल को रोक सके तो मैं, मेरे पिता तथा सब लोग बच सकेंगे।’

इसके बाद उसने सोच-विचारकर अपना हाथ वहाँ दे दिया जहाँसे जल आ रहा था और इस प्रकार जल का आना तथा छेदका बढ़ना रोक दिया। सारी रात उसने इसी प्रकार अपना हाथ पानी रोकनेमें लगाये रखना। एक तो कड़ाकेके जाड़ेकी रात थी, दूसरे वह ठंढी जगह बैठा था और तीसरे उसका हाथ पानीमें डूबा हुआ था। इन तीनों कारणोंसे उसे बहुत ही अधिक जाड़ा लग रहा था, पर वह इसकी तनिक भी परवा न करके जहाँ-का-तहाँ ही बैठा रहा ।

घरपर उसका पिता उसकी बाट जोह रहा था। सबेरेके समय उधरसे जाते हुए एक आदमी ने उस लड़केको बाँधके पास बैठे और बाँधके छेदमें हाथ घुसेड़े हुए देखकर पूछा-‘तू यहाँ क्या कर रहा है ?’ लड़केने लड़खड़ाती हुई आवाजमें कहा कि ‘यहाँसे पानी निकलता है, इसको मैंने रोक रखा है, नहीं तो गाँव डूब जाएंगे।

इससे अधिक वह बोल न सका; क्योंकि वह भूखा था और घोर शीतके कारण बेसुध हो गया था। इसके बाद उस आदमीने उसका हाथ निकालकर अपना हाथ वहाँ डाल दिया और सहायता के लिये पुकार मचायी। थोड़ी देर में लोग आ गये और उन्होंने पानी निकलनेकी जगहको अच्छी तरह भर दिया। पीछे उस लड़के को लोगोंने बहुत सम्मान प्रदान किया; क्योंकि स्वयं संकट झेलकर उसने सारे गांव को डूबनेसे बचाया था।

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