महालया अमावस्या के दिन पूजा करने से मिलेगी पितरों को शांति और परिवार होगा समृद्ध

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महालया अमावस्या 2020 कब है

17 सितंबर 2020 को महालया अमावस्या मनाई जाएगी अमावस्या के दिन से ही भगवती दुर्गा की पूजा प्रारंभ होती है इस दिन से ही लोग श्रद्धापूर्वक भगवती के सभी स्वरूपों की पूजा करना प्रारंभ कर देते हैं महालया अमावस्या की रात्रि को भगवती दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है जिससे प्रसन्न होकर भगवती दुर्गा सभी दुखों का विनाश कर देती है और व्यक्ति को मनोवांछित फल प्रदान करती है अमावस्या के दिन नदी में स्नान करने से बहुत ही ज़्यादा पुण्य फल प्राप्त होता है

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महालया अमावस्या या पितृ अमावस्या का क्या महत्व है

महालया अमावस्या विशेषकर बंगाल एवं बंगाल से जुड़े राज्यों में ज़्यादा प्रचलन में हैं महालया अमावस्या के दिन से ही दुर्गा जी की पूजा शुरू एवं उनकी स्वरूप को सजाने का कार्य होता है

इस महालया अमावस्या की कथा कुछ इस प्रकार है की जब महिषासुर नामक भयानक राक्षस तीन लोगों को प्रताड़ित किये था और तीनों लोकों के जीवों परेशान करता था तब सारी देवताओं ने मिलकर इस महालया अमावस्या के दिन देवी दुर्गा का आवाहन किया था तब देवी दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दिया और देवताओं को अब है प्रदान किया है इसी दिन भगवती दुर्गा कैलाश को छोड़कर पृथ्वी पर आती है और नौ दिन पृथ्वी पर ही वास करती है और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती है

पितृ शांति या काल भैरव शांति करने की विधि एवं पूजा

  • सबसे पहले मैं तक की जन्म तारीख़ या जन्म समय या मृत्यु की तारीख़ या मृत्यु का वर्ष के साथ मृतक की एक फ़ोटो होनी चाहिए यदि मृत्यु तारीख़ याद नहीं है तो केवल माता पिता के नाम के साथ एक फ़ोटो रख ले
  • फ़ोटो के सामने एक दिया जलाना है
  • मृतक की फ़ोटो के सामने अगरबत्ती या धूप बत्ती जला दें
  • फ़ोटो के सामने एक जल का पात्र रख लें
  • मृतक के नाम का जल से तर्पण करें
  • यदि ज्ञात हो तो मृतक की पसंद का भोजन तैयार कर लें और मृतक की फ़ोटो के सामने रख लें
  • तर्पण कि ये हुई जेल को किसी नदी में विसर्जित कर दें

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